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MANAV


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HONOUR KILLING… खाप उसके हाथों को चूमेगी

Posted On: 1 Aug, 2010  
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हाय रे ये जलन….

Posted On: 29 Jul, 2010  
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कौन बनेगा ब्लॉग स्टार

Posted On: 16 Jun, 2010  
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Others न्यूज़ बर्थ मस्ती मालगाड़ी में

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क्या ये चोरी जायज है?

Posted On: 16 Jun, 2010  
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मेरा पहला पोस्ट

Posted On: 6 Jun, 2010  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा:

के द्वारा:

मानव जी, आपका लेख बहुत ही संतुलित और सही विचारों को प्रकट करता है| निःसंदेह संस्कार ही आनर किलिंग को रोकने का एक मात्र तरीका है| कुछ हद तक हमारी नीतियों में खामियां भी इसके लिए जिम्मेदार हैं- जैसे स्कूल और कालेज में सेक्स एजुकेशन की नहीं बल्कि मारल एजुकेशन की जरूरत है जिसे नीतियां नज़र अंदाज़ कर रही हैं| लेकिन सबसे बड़ी जिम्मेदारी माता-पिता की है| फिर वे अपनी गलतियों के लिए बच्चों का क़त्ल करते हैं तो उनका अपराध और ज्यादा शर्मनाक बन जाता है, यहाँ पर मैं बच्चों द्वारा किये गए कार्य को जायज़ नहीं कह रहा सिर्फ एक नाजायज़ कार्य को रोकने के लिए दुसरे नाजायज़ कार्य की भर्त्सना कर रहा हूँ| सबसे बड़ी दिक्कत तो किशोर और अल्प वयस्क युवाओं की है, जिस उम्र में उन्हें अपने भविष्य, माता-पिता की सेवा और देश की चिंता होनी चाहिए वे छैला-छबीली का खेल खेलने में मस्त हैं| बुरा मत मानियेगा लेकिन जिसे लोग प्यार कह रहे हैं वो वास्तव में प्यार नहीं यही खेल है| आपने जो कविता जोड़ी है वो स्वयं में विरोधाभाषों से भरी है अगर मैं इन पंक्तियों का विवेचन यहाँ करूँ तो ठीक भी नहीं होगा क्योंकि इस कविता का वास्तविक लेखक ही मेरी टिप्पड़ी का अवलोकन करे तो बेहतर होगा| आपकी पोस्ट सराहनीय है| आपसे और भी मुद्दों पर अच्छे विचार मिलने की आशा के साथ इस पोस्ट पर हार्दिक बधाई!

के द्वारा: chaatak chaatak

वाह, मानव जी सही जा रहे हो वैसे आपको गुरू जी बोलने का मन कर रहा है अभी कुछ दिन पहले ही या यु कहे की जब से मैं यहाँ हूँ तब से आप जैसे ही एक गुरु से पाला पड़ा था जो लिखना शुरू तो करते थे किसी और विषय पर लेकिन पहुँच जाते थे कहीं और ............बिलकुल वैसे ही आपने लिखना तो शुरू किया जागरण के बदलाव को लेकर और पहुँच गए नारी केंद्र .............खैर, सर आप मुझे भी बता दीजिये की मैं शायद कहीं किसी महिला के ब्लॉग पर जाना भूल गई हो ........वैसे यहाँ पुराने ब्लोगर सभी जान चुके है मैं अक्सर पहुँचने में लेट हो जाती हूँ ..........अभी फिलहाल तो रौशनी जी, अनीता पॉल जी , और हमारी पुरानी साथी अदीति कैलाश जी ( जो कुछ दिनों से नदारद है ) के ब्लॉग पर ही पहंची हूँ एक माला जी भी है जिनका अभी तक ब्लॉग पढ़ नहीं पायी ! तो सर ये बेकार की controversy क्रियेट करना बंद कीजिये और कुछ अच्छा लिखिए क्योंकि यहाँ राखी सावंत ज्यादा दिन टिक नहीं पाती ! अब तो आखिर में यही की काश अदिति जी इसे एक बार पढ़ ले ! अच्छे अच्छे की क्लास ली है उन्होंने ! माफ़ करना थोडा कडवा बोल गई या फिर थोडा तीखा मेरे ब्लॉग का नाम ही यही है ! प्लीज़ इसे पर्सनली मत लेना !

के द्वारा:

यह पूर्ण रूप से सत्य है की किसी भी रचना को पदार्पित करने वाले रचनाकार का कोई लिंग नहीं होता| परन्तु जिस मंच पर प्रतियोगिता हो तो ऐसा होना स्वाभाविक है चूँकि प्रतियोगिता में हर इन्शान अपने आप को आगे पाना चाहता है| अतः इसको कृपया जलन का रूप मत प्रदान करे यह एक होड़ है जिसमे रचनाकार के रूप में प्रतियोगी और जागरण जंक्सन वह मंच है जहा पर ये प्रतियोगी भाग ले रहे है और जिसको जितना जादा सराहा जा रहा वह इस मंच का विजेता कहलाता है| और देकिये इस बार की साप्ताहिक विजेता अनीता पौल जी है| और रही बात स्त्रियों की तो उनका यह स्वाभाव उनका एक गुण है जो उनकी एक पहचान भी है| कुछ रचनाओ को स्त्री का चोला पहना भी बहुत जरूरी है जैसे की मम्मता,- मम्मता को एक माँ से अच्छा और कोई नही बयाँ कर सकता है क्योकि हम एक माँ की मम्मता को केवल महसूस कर सकते है और माँ भी एक स्त्री होती है|

के द्वारा:




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